चौराचौरा कांड भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐसा अध्याय है, जिसने आंदोलन की दिशा और दृष्टिकोण को बदल दिया। यह घटना 4 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौराचौरा नामक स्थान पर घटी, जहां शांतिपूर्ण विरोध ने अप्रत्याशित रूप से हिंसा का रूप ले लिया। पृष्ठभूमि 1919 में जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद, भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष चरम पर था। महात्मा गांधी ने 1920 में असहयोग आंदोलन की शुरुआत की, जिसमें विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार, करों का न भुगतान और अंग्रेजी शासन के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध शामिल था। चौराचौरा के ग्रामीण भी इस आंदोलन का हिस्सा बने। हालांकि, इस क्षेत्र में किसानों और मजदूरों पर ब्रिटिश पुलिस द्वारा अत्यधिक अत्याचार हो रहा था। 4 फरवरी 1922 को, एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने की कोशिश में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। घटना का विवरण चौराचौरा कस्बे में उस दिन करीब 2000 लोग अंग्रेजों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। टकराव की शुरुआत प्रदर्शनकारियों ने थाने के सामने विरोध किया। पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज...
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