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तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक

 तापमान जलवायु का सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है। अतः धरातल पर तापमान के अनुसार ही जलवायु प्रदेश और जलवायु के अनुसार वनस्पति प्रदेश निश्चित होते हैं। यही क्यों धरातल पर सभी प्राणियों, जीव-जन्तुओं तथा मानव के जीवन का आधार भी तापमान ही है। अतः पृथ्वी के धरातल पर तापमान के वितरण का भौगोलिक अध्ययन बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। धरातल पर तापमान के वितरण के अनेक रूप हैं यथा-(i) ऊर्ध्वाधरवितरण (Vertical Distribution), (ii) क्षैतिज वितरण (Horizontal Distribution), (iii) प्रादेशिक वितरण (Regional Distribution) व (iv) कालिक वितरण (Temporal Distribution) आदि। चूँकि तापमान का वितरण अनेक कारकों से प्रभावित होता है अतः तापमान के वितरण को समझने से पूर्व उन कारकों की व्याख्या को समझ लेना आवश्यक है जो कि तापमान के वितरण को प्रभावित करते हैं। तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले कारक निम्न प्रकार हैं- 1. अक्षांश (Latitude) - धरातल पर तापमान का वितरण सदा अक्षांश के अनुसार होता है, क्योंकि धरातल पर पहुँचने वाली सूर्य की किरणों का कोण पृथ्वी की घूर्णन गति के कारण ...

विकिरण (Radiation) किसे कहते हैं ? विकिरण के प्रमुख रूपों का उल्लेख

जिस क्रिया द्वारा ताप बिना किसी भौतिक माध्यम के एक वस्तु से दूसरी वस्तु में प्रवेश करता है उस क्रिया को विकिरण कहते हैं। वस्तुतः प्रत्येक वस्तु एक निश्चित तापमान पर अपनी ऊष्मा को विभिन्न प्रकार की तरंगों द्वारा छोड़ती है। यही विकिरण के कई रूप हैं। जब कोई वस्तु किसी तापमान पर हर प्रकार की तरंगों द्वारा अधिकतम ताप छोड़ती है तो उसे ब्लेक बॉडी (Black Body) कहा जाता है और उससे होने वाले विकिरण को कृष्णिका विकिरण (Black body Radiation) कहते हैं। पृथ्वी के धरातल से होने वाला विकिरण दूसरे प्रकार का होता. है।  किन्तु उसी तापमान पर जब कोई वस्तु केवल कुल विशेष तरंगों के रूप में ही विकिरण करती है तो उसे वर्णात्मक विकिरण (Selective Radiation) कहा जाता है। वायुमण्डल की कुछ गैसें वरणात्मक विकिरण ही करती हैं। पृथ्वी सौर्थिक ऊर्जा का 51% भौग प्राप्त करती है। सूर्य से आने वाली यह ऊर्जा सूक्ष्म लहरों के रूप में आती है जो धरातल द्वारा ग्रहण की जाती है। धरातल इसे ग्रहण कर ऊष्मा में बदल देती है। सौर्थिक ऊर्जा को इस प्रकार ग्रहण करने और उसे ऊष्मा में बदल देने से धरातल गरम हो उठता है। फलस्वरूप तप्त धरात...

मौसम व जलवायु में अन्तर , मौसम व जलवायु में अन्तर स्पष्ट करते हुए जलवायु व मौसम के तत्वों का संक्षेप में वर्णन

 स्थल एवं जलमण्डल के अतिरिक्त वायुमण्डल का अध्ययन भी भौतिक भूगोल में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। हमारे चारों ओर वायु का आवरण विस्तृत रूप से तना हुआ है। पी. लेक महोदय के शब्दों में वायुमण्डल की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है-"The outer envelope of the gases of the planet upon which we live is called the atmosphere." मानव जीवन पर वायुमण्डल तत्व अपना प्रभाव पूर्णतः रखता है। इन सभी वायुमण्डलीय तत्वों के सामूहिक रूप को ही जलवायु की संज्ञा दी जाती है। जलवायु एक यौगिक शब्द है, जिसमें जल व वायु दोनों का ही योग है। जल का अर्थ है, आर्द्रता, उसकी मात्रा तथा उत्पत्ति। वायु का अर्थ है हवा की गति, उसकी दिशा व उत्पत्ति, जो दबाव में अन्तर होने के कारण उत्पन्न होती है। दबाव स्वयं तापमान पर आधारित होता है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि उक्त तत्वों की मिश्रित व्याख्या ही जलवायु के अन्तर्गत आती है। मौसम का अर्थ एवं परिभाषाएँ  (Meaning and Definitions of Weather) मौसम से अर्थ है प्रतिदिन की परिवर्तनशील वायुमण्डलीय घटनाएँ। मौसम सदैव ही परिवर्तनशील रहता है। कोपे तथा द लॉग के अनुसार-किसी विशेष स्थान और...