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मानव की प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक एवं चतुर्थक आर्थिक क्रियाकलाप । (Primary, secondary, tertiary and quaternary economic activities of humans

मानव की आर्थिक क्रियाएँ (economic activities of humans ) आर्थिक भूगोल मानव की समस्त आर्थिक क्रियाओं व जीविकोपार्जन के साधनों (Means of livelihood) का अध्ययन करता है। मानव की उत्पादन सम्बन्धी आर्थिक क्रियाओं को टूमैन एवं अलेक्जेण्डर द्वारा निम्न श्रेणियों में बाँटा गया है- 1. प्राथमिक उत्पादन सम्बन्धी क्रियाएँ (Primary Activities) - जिनमें प्रकृतिदत्त संसाधनों का सीधा उपयोग होता है। कृषि कार्य में मिट्टी का सीधा उपयोग फसलें उगाने के लिए किया जाता है। इस प्रकार जल क्षेत्रों में मछली पकड़ना, खानों से कोयला, लोहा आदि खनिज निकालना, वनों से लकड़ियाँ काटना अथवा पशुओं से ऊन, कपड़ा, बाल, खालें, हड्डियाँ आदि प्राप्त करना प्राथमिक उत्पादन क्रियाएँ हैं। इनसे सम्बन्धित उद्योगों को प्राथमिक उद्योग कहा जाता है। जैसे, कृषि करना, खानें खोदना, मछली पकड़ना, आखेट करना, वस्तुओं का संचय करना, वन सम्बन्धी उद्योग आदि। इस समूह में कार्यरत् व्यक्ति लाल कॉलर श्रमिक (Red collar worker) कहलाते हैं। 2.  द्वितीयक क्रियाएँ  (Secondary Activities) - जिनके अन्तर्गत प्रकृतिदत्त संसाधनों का सीधा उपयोग नहीं किय...

विकिरण (Radiation) किसे कहते हैं ? विकिरण के प्रमुख रूपों का उल्लेख

जिस क्रिया द्वारा ताप बिना किसी भौतिक माध्यम के एक वस्तु से दूसरी वस्तु में प्रवेश करता है उस क्रिया को विकिरण कहते हैं। वस्तुतः प्रत्येक वस्तु एक निश्चित तापमान पर अपनी ऊष्मा को विभिन्न प्रकार की तरंगों द्वारा छोड़ती है। यही विकिरण के कई रूप हैं। जब कोई वस्तु किसी तापमान पर हर प्रकार की तरंगों द्वारा अधिकतम ताप छोड़ती है तो उसे ब्लेक बॉडी (Black Body) कहा जाता है और उससे होने वाले विकिरण को कृष्णिका विकिरण (Black body Radiation) कहते हैं। पृथ्वी के धरातल से होने वाला विकिरण दूसरे प्रकार का होता. है।  किन्तु उसी तापमान पर जब कोई वस्तु केवल कुल विशेष तरंगों के रूप में ही विकिरण करती है तो उसे वर्णात्मक विकिरण (Selective Radiation) कहा जाता है। वायुमण्डल की कुछ गैसें वरणात्मक विकिरण ही करती हैं। पृथ्वी सौर्थिक ऊर्जा का 51% भौग प्राप्त करती है। सूर्य से आने वाली यह ऊर्जा सूक्ष्म लहरों के रूप में आती है जो धरातल द्वारा ग्रहण की जाती है। धरातल इसे ग्रहण कर ऊष्मा में बदल देती है। सौर्थिक ऊर्जा को इस प्रकार ग्रहण करने और उसे ऊष्मा में बदल देने से धरातल गरम हो उठता है। फलस्वरूप तप्त धरात...

मौसम व जलवायु में अन्तर , मौसम व जलवायु में अन्तर स्पष्ट करते हुए जलवायु व मौसम के तत्वों का संक्षेप में वर्णन

 स्थल एवं जलमण्डल के अतिरिक्त वायुमण्डल का अध्ययन भी भौतिक भूगोल में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। हमारे चारों ओर वायु का आवरण विस्तृत रूप से तना हुआ है। पी. लेक महोदय के शब्दों में वायुमण्डल की परिभाषा इस प्रकार दी जा सकती है-"The outer envelope of the gases of the planet upon which we live is called the atmosphere." मानव जीवन पर वायुमण्डल तत्व अपना प्रभाव पूर्णतः रखता है। इन सभी वायुमण्डलीय तत्वों के सामूहिक रूप को ही जलवायु की संज्ञा दी जाती है। जलवायु एक यौगिक शब्द है, जिसमें जल व वायु दोनों का ही योग है। जल का अर्थ है, आर्द्रता, उसकी मात्रा तथा उत्पत्ति। वायु का अर्थ है हवा की गति, उसकी दिशा व उत्पत्ति, जो दबाव में अन्तर होने के कारण उत्पन्न होती है। दबाव स्वयं तापमान पर आधारित होता है। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि उक्त तत्वों की मिश्रित व्याख्या ही जलवायु के अन्तर्गत आती है। मौसम का अर्थ एवं परिभाषाएँ  (Meaning and Definitions of Weather) मौसम से अर्थ है प्रतिदिन की परिवर्तनशील वायुमण्डलीय घटनाएँ। मौसम सदैव ही परिवर्तनशील रहता है। कोपे तथा द लॉग के अनुसार-किसी विशेष स्थान और...