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जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक

 जनसंख्या को प्रभावित करने वाले कारक

जनसंख्या को प्रभावित करने वाले कारक विभिन्न प्रकार के भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, और राजनीतिक पहलुओं से जुड़े होते हैं। ये कारक यह निर्धारित करते हैं कि किसी क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व और वितरण कैसा होगा। इन कारकों को मुख्यतः दो वर्गों में बांटा जा सकता है:



1. प्राकृतिक (भौतिक) कारक

(i) जलवायु:

  • अनुकूल जलवायु (जैसे मॉडरेट तापमान और पर्याप्त वर्षा वाले क्षेत्र) अधिक जनसंख्या को आकर्षित करते हैं।
  • अत्यधिक ठंडे (साइबेरिया), गर्म (सहारा मरुस्थल), या आर्द्र जलवायु (अमेज़न वर्षावन) वाले क्षेत्रों में जनसंख्या कम होती है।

(ii) भू-आकृति (स्थलाकृति):

  • समतल और उपजाऊ भूमि वाले क्षेत्र (जैसे गंगा-यमुना का मैदान) घनी आबादी वाले होते हैं।
  • पहाड़ी, दुर्गम और कठिन स्थलाकृति वाले क्षेत्रों (जैसे हिमालय) में जनसंख्या कम होती है।

(iii) मिट्टी की उर्वरता:

  • उपजाऊ मिट्टी (जैसे नदी घाटियों में) कृषि योग्य होती है, जिससे जनसंख्या घनत्व अधिक होता है।
  • बंजर भूमि या मरुस्थलीय क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व कम होता है।

(iv) जल संसाधन:

  • नदियों, झीलों और भूमिगत जल स्रोतों की उपलब्धता वाले क्षेत्र अधिक जनसंख्या वाले होते हैं।
  • जल की कमी वाले क्षेत्र, जैसे मरुस्थल, कम आबादी वाले होते हैं।

(v) खनिज और प्राकृतिक संसाधन:

  • खनिज और ऊर्जा संसाधन जैसे कोयला, तेल आदि की उपलब्धता वाले क्षेत्र (जैसे खनिज क्षेत्र) औद्योगिक गतिविधियों के कारण जनसंख्या को आकर्षित करते हैं।

2. मानव निर्मित (सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक) कारक

(i) आर्थिक गतिविधियाँ:

  • रोजगार के अवसर वाले क्षेत्र (जैसे औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र) अधिक जनसंख्या को आकर्षित करते हैं।
  • ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार के अवसर कम होने के कारण जनसंख्या घनत्व कम होता है।

(ii) शहरीकरण:

  • शहरों में बेहतर जीवन स्तर, शिक्षा, चिकित्सा, और परिवहन सुविधाएँ अधिक जनसंख्या को आकर्षित करती हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण कम जनसंख्या रहती है।

(iii) सामाजिक और सांस्कृतिक कारक:

  • धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले स्थान (जैसे वाराणसी, हरिद्वार, मक्का) अधिक जनसंख्या वाले होते हैं।
  • सामाजिक स्थिरता और सुरक्षा वाले क्षेत्र भी जनसंख्या वृद्धि में सहायक होते हैं।

(iv) परिवहन और संचार:

  • जहाँ बेहतर परिवहन और संचार के साधन उपलब्ध होते हैं, वहाँ व्यापार और उद्योग का विकास होता है, जिससे जनसंख्या आकर्षित होती है।

3. ऐतिहासिक और राजनीतिक कारक

(i) ऐतिहासिक महत्व:

  • ऐतिहासिक रूप से विकसित क्षेत्र जैसे प्राचीन सभ्यताएँ (मिस्र, सिंधु घाटी) आज भी घनी आबादी वाले हैं।

(ii) राजनीतिक स्थिरता:

  • राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा वाले क्षेत्र जनसंख्या के लिए आकर्षक होते हैं।
  • युद्ध और अशांति से प्रभावित क्षेत्र (जैसे सीरिया, अफगानिस्तान) में जनसंख्या कम हो जाती है।

(iii) सरकारी नीतियाँ:

  • जनसंख्या नियंत्रण और प्रोत्साहन नीतियाँ भी जनसंख्या वृद्धि दर को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, चीन की "एक बच्चा नीति"।

(iv) उपनिवेशवाद और प्रवासन:

  • औपनिवेशिक प्रभाव और प्रवासन नीतियाँ भी जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करती हैं।

4. पर्यावरणीय और आपदाएँ

  • प्राकृतिक आपदाएँ जैसे बाढ़, भूकंप, सूखा, और तूफान प्रभावित क्षेत्रों में जनसंख्या कम होती है।
  • प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन भी जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करते हैं।

निष्कर्ष

जनसंख्या को प्रभावित करने वाले कारक आपस में जुड़े हुए हैं और एक क्षेत्र की भौतिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक विशेषताएँ यह निर्धारित करती हैं कि वहाँ कितनी और कैसी जनसंख्या निवास करेगी। इन कारकों का अध्ययन जनसंख्या भूगोल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


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